आज एक जगह नार्वे के बारे में पढने का मौका मिला।1994 में नॉर्वे ने यूरोपीय संघ की सदस्यता लेने के विरोध में जनमत-संग्रह में अपना मत दिया था। ये मतदान प्रधानमंत्री ग्रो हारलेम ब्रंटलैंड के लिए एक झटका साबित हुआ था, जिनका एक अहम लक्ष्य था नॉर्वे को यूरोपीय संघ का सदस्य बनाना। इससे पहले 1972 में भी नॉर्वे ने इसके विरोध में ही मत दिया था। इसके बाद तत्कालीन सरकार को हटना पड़ा था। यहां के कुछ कानून ऐसे हैं जो बहुत ही अजीबोगरीब हैं।
यहाँ पर लोगों को टीवी-वीसीआर खरीदने के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है। लाइसेंस मिलने के बाद ही वे अपने घरों में टीवी-वीसीआर ले जा सकते हैं।
यहाँ पर एक कानून है कि वेश्यावृत्ति गैरकानूनी है, लेकिन वेश्या नहीं। ऐसा करने वाले को कड़ी सजा का प्रावधान है। लेकिन आपको जानकर हैरत होगी कि भले ही वेश्यावृत्ति यहां पर गैरकानूनी है, लेकिन अगर कोई लड़की इसे अपनाती है तो ऐसा करना अवैध माना जाता है।
दुनियाभर के कई देशों में लोग अपने पालतू जानवरों को नपुंसक (बधिया) बनवा देते हैं, लेकिन नॉर्वे में ऐसा नहीं किया जा सकता है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।
इस देश में ऐसा ही एक और कानून है जिसके अनुसार कोई व्यक्ति एक साथ 4 बोतल से ज्यादा शराब नहीं खरीद सकता है। अगर ऐसा कोई करता है तो वह और दुकानदार दोनों पर ही कार्रवाई का प्रावधान है। बताया जाता है कि सन् 1900 के आसपास लोग अत्यधिक शराब पीने की वजह से वोटिंग जैसी प्रक्रिया में भी हिस्सा नहीं ले पाते थे। ऐसे में सरकार ने इस कानून को बना दिया।
यहाँ पर लोगों को टीवी-वीसीआर खरीदने के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है। लाइसेंस मिलने के बाद ही वे अपने घरों में टीवी-वीसीआर ले जा सकते हैं।
यहाँ पर एक कानून है कि वेश्यावृत्ति गैरकानूनी है, लेकिन वेश्या नहीं। ऐसा करने वाले को कड़ी सजा का प्रावधान है। लेकिन आपको जानकर हैरत होगी कि भले ही वेश्यावृत्ति यहां पर गैरकानूनी है, लेकिन अगर कोई लड़की इसे अपनाती है तो ऐसा करना अवैध माना जाता है।
दुनियाभर के कई देशों में लोग अपने पालतू जानवरों को नपुंसक (बधिया) बनवा देते हैं, लेकिन नॉर्वे में ऐसा नहीं किया जा सकता है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।
इस देश में ऐसा ही एक और कानून है जिसके अनुसार कोई व्यक्ति एक साथ 4 बोतल से ज्यादा शराब नहीं खरीद सकता है। अगर ऐसा कोई करता है तो वह और दुकानदार दोनों पर ही कार्रवाई का प्रावधान है। बताया जाता है कि सन् 1900 के आसपास लोग अत्यधिक शराब पीने की वजह से वोटिंग जैसी प्रक्रिया में भी हिस्सा नहीं ले पाते थे। ऐसे में सरकार ने इस कानून को बना दिया।
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