बहुत पहले मैने indian Express में एक रिपोर्ट पढी थी, और इस लिखा था तो जाहिद भाई अचंभित थे। आज भी वही बात एक मराठी अखबार में पढ कर बडा दुख हुआ।
एक ऐसा गांव जहां लोग पानी के लिए कई लड़कियों से शादियां करते हैं। इस प्रथा पर हाल ही में एक शॉर्ट फिल्म भी बनी है, जिसे यू-ट्यूब पर महज तीन दिन में 41 हजार से ज्यादा लोगों ने देख लिया है। यह फिल्म भारत में एंटी पोवर्टी एजेंसी 'एक्शनएड इंडिया' ने बनाया है। फिल्म की कहानी महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाके विदर्भ के गांव देंगमाल की है। यहां के घरों में पिछले कई सालों से ऐसा प्रचलन चल रहा है। यहां लोग कई शादियां मुख्य रूप से पानी लाने के लिए ही करते हैं। रोचक बात यह है कि पंचायत ने भी इस चलन को मान्यता दे रखी है। 25 नवंबर को यू-ट्यूब पर इस शॉर्ट फिल्म को जारी किया गया।
एक आदमी अपनी तीन पत्नियों के साथ रहता है। एक को पत्नी का आधिकारिक दर्जा हासिल है, जबकि बाकी दो कहलाती हैं पानी वाली बाई।
गांव में 'पानी वाली बाई' रखने का चलन पानी की समस्या के चलते बढ़ा है। गांव में नल नहीं हैं। इसलिए ये पत्नियां तीन किमी दूर घंटों पैदल चलकर पानी लेने जाती हैं। इसीलिए इन्हें पानीवाली बाई के नाम से जाना जाता है। दूसरी या तीसरी पत्नी वही बनती हैं, जिनके पति की या तो मौत हो चुकी हो या फिर उनके पहले पति ने उन्हें छोड़ दिया हो।
गांव में लड़की के जन्म पर खुशी मनाई जाती है, क्योंकि माना जाता है कि पानी भरने के लिए परिवार में एक और सदस्य आ गया। हालांकि, ये औरतें उम्मीद करती हैं कि जब उनकी बेटियां बड़ी होंगी तो उनके गांव में भी नल होंगे। किसान के घर में हर दिन लगभग 100 लीटर पानी खर्च होता है। कई चक्कर लगाने पर ये जरूरत पूरी होती है। एक आदमी की पहली पत्नी शादी के तुरंत बाद गर्भवती हो गई। पानी भरकर नहीं ला सकती थी। इसलिए दूसरी पत्नी आई। उसकी उम्र थोड़ी ज्यादा थी।
कुछ दिन बाद उसके लिए भी पानी भरकर लाना मुश्किल होने लगा। इसके बाद तीसरी शादी की। तीसरी सिर्फ 26 साल की थी। उसके पति की मौत हो चुकी थी। अब पहली बच्चों को संभालती है, दूसरी घर के बाकी काम करती है। उस आदमी की तीनों पत्नियां एक ही घर में रहती हैं। पहली की जिम्मेदारी है कि वह बाकी दोनों की जरूरतों का ख्याल रखे। इनमें कई बार झगड़े भी होते हैं। फिर भी ये औरतें दूसरी और तीसरी बीवी बनकर खुश हैं। करीब-करीब पूरे गांव में इस तरह की परंपरा दिखाई देती है।
एक अन्य घटना ऐसे ही किसी गांव की क्राइम पेट्रोल के एपिसोड में देखी थी। जहाँ मराठवाडा के एक गांव में लड़कियों को बेचने के लिए हर चार महीने में मंडी लगती है। लड़कियों की बोली लगाई जाती है फिर रसीद के साथ 50-80 तक में एक साल के लिए बेच दिया जाता है। फिर शुरू होता है उनपर जुर्म का सिलसिला।
एक और बेहद डरावनी खबर है। मुंबई से करीब तीन सौ किलोमीटर दूर शनि शिंगणापुर के शनि मंदिर में महिला श्रद्धालु के दर्शन के बाद से विवाद हो गया है. कल दोपहर एक महिला श्रद्धालु मंदिर में पहुंच गई. जिसके बाद आज मंदिर का शुद्धिकरण किया जा रहा है. एबीपी न्यूज़ पर देखा कि सीसीटीवी की तस्वीरों में महिला श्रद्धालु हाथ में बर्तन लेकर शनि महाराज की मूर्ति तक पहुंचती है और फिर तेल चढ़ाकर तेजी में लौट आती है. बताया जा रहा है कि चार सौ साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. भला इससे बुरी खबर और क्या हो सकती है? भगवान खुद स्त्री की इस दशा में भागीदार हैं। सबसे पहले तो मुझे पहली बार यह बात सुनकर बहुत गुस्सा आया था कि अपने कठिन दिनों में महिलाओं को भगवान की पूजा करना मना है। मैं अगर कुछ बडा बना तो इसके खिलाफ एक कानून बना दूगा। आखिर भगवान ने ही तो महिलाओं की ऐसी शारीरिक बनावट की जिससे उन्हें 9 महीने पेट में बच्चा रखने से लेकर लेडीज प्रोब्लम तक कष्ट सहन करना पडता है। इतिहास के भगवान से लेकर राजा महाराजा तक इसके लिए दोषी हैं। सबने अपने अपने हिसाब से और मतलब के लिए स्त्री का प्रयोग किया है।
कई बार लगता है कि भगवान, कानून और सरकार सब किस लिए है? आंसू आ गए आज ये सब पढते और लिखते हुए। बदलाव और सुधार के लिए हमें खुद आगे आना होगा। जब तक राजनीति नहीं बदलेगी, तबतक अच्छे कानून नहीं बनेगे। इसके बाद ही महिलाओं की स्थिति में सुधार ला सकते हैं। मुंबई दिल्ली के बाहर की ओर इशारा है मेरा। बात केवल भारत की ही नहीं है मैंने टाइम्स ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर देखा की आर्थिक मंदी के कारण ग्रीस की महिलाओ को एक एक सैंडविच के लिए जिस्मफरोशी करना पड रहा है। आपको भी मेरी तरह ही गुस्सा आया होगा पढकर लेकिन कभी अपने अंदर झाँक कर देखा है? जी हां, काॅलेज में, सिनेमा हॉल में या पब्लिक प्लेस पर किसी लड़की को जाते हुए देखकर "माल, आइटम जैसे बाजारू शब्दों" का प्रयोग आपको भी उन बेचने वालों की श्रेणी में ले जाता है। शायद कुछ राष्ट्रवादी मुझे आज भी गाली देगे क्योंकि मैंने देश, भगवान और मर्दो के खिलाफ सच्चाई लिख दी है। मैं देशद्रोही हो सकता हूं क्योंकि बाहर के लोगों को यह बात पता चली तो देश की बदनामी होगी। सरकार को मैरिटल रेप(शादी के बाद यौन संबंधो में बराबरी) और हिंदू कोड बिल जैसे कानून लाना चाहिए।
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