एस सी एस टी एक्ट 2015 पता नहीं कब बदलकर आ गया मुझे पता भी नहीं चल पाया। अब अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के खिलाफ अत्याचार करने वालों पर अब से कड़ी कार्रवाई हो सकेगी। इस बारे में शिड्यूल्ड कास्ट एंड द शिड्यूल्ड ट्राइब्स अमेंडमेंट एक्ट, 2015 मंगलवार से प्रभावी हो गया है।
नए एक्ट के अनुसार एसटी/एससी सदस्यों के बाल या मूंछ छीलना, उन्हें खेती करने से रोकना, जूते-चप्पलों की माला पहनाना, शवों का निस्तारण करने और कब्र खोदने के लिए मजबूर करना, जाति का नाम लेकर गाली देना, साफ-सफाई के लिए इस्तेमाल करना जैसे कार्य जिनसे उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाती है।
मजबूर करना अपराध माना जाएगा। इन काम के लिए इन्हें मजबूर करना अपराध माना जाएगा। सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार, समाज की किसी महिला के कपड़े उतारकर उसे चोट पहुंचाने, घर या गांव छोड़ने के लिए मजबूर करने और लैंगिक इशारे करने पर भी कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। अब विशेष अदालतों के पास अपराध के स्वत: संज्ञान लेने का अधिकार होगा। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद वे दो महीने के अंदर केस की सुनवाई पूरी कर सकेंगी।
केंद्र सरकार की योजना इस कानून को प्रभावी रूप से लागू कराने की भी है। इसके लिए गैर एससी या एसटी सरकारी कर्मियों के ड्यूटी में कोताही बरतने पर दंडित करने के प्रावधान पर विचार कर रही है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री ने एक जवाब में कहा कि सभी पक्षों से सलाह मशविरा के आधार पर अत्याचार रोकथाम संशोधन के बारे में विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संशोधन का लक्ष्य एससी और एसटी समुदाय को बेहतर न्याय दिलाना है।
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