Tuesday, January 26, 2016

राष्ट्रभक्ति तो खून में बसी है दोस्त



अभी अभी खाना खाने के बाद कुछ देर टहलने के लिए अकेले ही निकल पडा तो देखा कि फुटपाथ पर कुछ तोडफोड हुई है नया बनाने के लिए। इस लिए नीचे चलने लगा तो एक 9-10 साल का लडका आग जला कर बैठा है। मैं भी उसके पास रुक कर मजाक में बोला,"बडी शर्दी है, तो मुझे एक ईटों का बना हुआ एक घर जैसा(छोटा सा बच्चों के खेलने वाली जगह) दिखाने लगा। ऊपर से पुराना अखबार हटाया तो फोटो में दिखाई दे रहे तिरंगे को बनाया है। बोला कल फ्लैग लगाऊँगा, तो मैंने मराठी में उसका नाम पूछा, मुझे लगा मराठी ही होगा। लेकिन जब उसने अपना नाम बताया तो अविश्वसनीय खुशी हुई। उसका नाम था, "रेहान"। कन्फर्म करने के लिए दो बार पूछा, "क्या?" फिर बताता है कि यहां अंडे की दुकान मेरे अब्बू की है।
अब ये तो पक्का विश्वास है कि मुस्लिम समाज के गरीब लोग भी अपने बच्चों को उतनी ही राष्ट्रभक्ति सिखाते हैं जितनी हमारे राष्ट्रवादी बजरंगी। रही बात उनमें से किसी एक दो के गलत रास्ते पर जाने की तो इससे पूरा समुदाय वैसा नहीं हो जाता है। हमारे यहां आशाराम जैसे कुछ बाबा खराब होने से सबको तो वैसा नहीं कह सकते हैं। अगर कुछ युवाओं को कुछ बाहरी और इंसानियत के दुश्मन लोग बहलाकर या ब्रेनवाॅस कर दुरूपयोग करते हैं तो उन्हें राष्ट्रभक्ति सिखा कर हम अपने देश के साथ ही रखेगे। उन्हें सौतेले की तरह नहीं सगे भाई की तरह समझाएंगे। फिर भी जो नहीं माने तो जाने कितने मुजाहिदीन हमारे देश के रक्षकों के आगे हार चुके हैं। तब फिर हमारे देश का मुस्लिम समाज मुंबई हमले के बाद के जैसे ऐसे लोगों को अपने कब्रिस्तान में जगह तक नहीं देगा। मुझे तो बडा गर्व है देश के ऐसे भविष्य(रेहान) पर। आप भी अपने आसपास ऐसे देश भक्त बच्चों को सम्प्रदायिक नजरों से बचाइए।

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