भले ही देर से लेकिन प्रधानमंत्री का रोहित की मौत पर दुख जताना अच्छा लगा। हो सकता है कि उनकी सोचपहले राजनीति न कर समय पर बोलने की हो। उम्मीद है कि जांच भी निष्पक्ष कराएंगे और दोषियों को सजा दिलाएंगे। शिक्षा मंत्री वसांसद को फटकार तो लगा ही सकते हैं। अच्छा होगा कि अति राष्ट्रवादी सेनाओं परलगाम लगाएंगे। लेकिन अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो हमें यही लगेगा कि आप नाटक कर रहेहैं।अन्य दलों को देखिए मौत पर मातम मनाने का ढोंग सियासी सूझबूझ से जारी है. जहां सांत्वना देनी चाहिए वहां सियासत होने लगी. ऐसे सियासी देश में आजाद ख्याल के रोहित का जीना बेकार था। व्यवस्था पर प्रश्न किए जाने पर गद्दार कहा गया।स्याही से अपनी तकदीर लिखने वह विश्वविद्यालय आया था. उस नासमझ को यही पता था कि तकदीर ऐसे ही लिखी जाएगी.पता है कि उस दिन अखबार के पन्ने से झांकती हुई रोहित की तस्वीर किसी को भी असहज कर सकती थी. असहज करने की वजह रोहित के मरने की ‘वजह’ थी. मैं अखबारों के पेज पर ज्यादा देर तक नजरें नहीं टिकाता. शायद इसीलिये अखबारों के जिस पन्ने पर आमतौर पर नजर भी नहीं रुकती,ठिठकी हुई अंगुलियां जानेंक्यों वही पन्ना पलट नहीं पाईं थी. स्याही से तकदीर लिखने की बात करने वालों ने ही उसका गलाघोंट दिया था.आज आंबेडकर यूनिवर्सिटी में रोहित को याद कर पीएम भावुक हो गए. पीएम ने कहा कि मजबूर होकर रोहित को खुदकुशी करनी पड़ी. उन्होंने कहा, ”जब ये खबर मिलती है कि मेरे देश के एक नौजवान बेटे रोहित को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा, उसके परिवार पर क्या बीती होगी. मां भारती ने अपना एक लाल खोया है.” प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ”कारण अपनी जगह पर होंगे, राजनीति अपनी जगह परह होगी, लेकिन सच्चाई यही है कि मां भारती ने अपना एक लाल खोया है.”‘कारण अपनी जगह पर होंगे’ बड़ी ही सफाई से इसे टाल रहेहैं. अरे कारण ही तो जिम्मेदार हैं। मुझे भारत के हर सियासी दल से वैसे ही घृणा हो रही है.. जैसे गुलाम भारत के लोगों को अंग्रेजों से थी. ये रोने धोने का नाटक करने के बजाए आप सत्ता में हैं ‘कारण’ पर कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं? 125 करोड़ का दंभ भरते हैं.. 56 इंच के सीने का दावा करते हैं और जब कठोर कदम उठाने की बात आती है तो सिर्फ रो धोकर.. भावुक होकर… खत्म कर लेते हैं.मौत पर शर्मिंदा होने का नाटक करने वाली सरकार झूठ बोल रही है. आपकी सरकार ने एबीवीपी के कार्यकर्ताओं से भिड़ने की सजा उन छात्रों को दे दी. कार्रवाई को लेकर आपकी सरकार इतनी बेसब्र हो उठी थी कि वीसी को26 दिन के भीतर 3 रिमाइंडर भेजे गये. रोने के बजाए जाकरजरा पूछिएगा अपने शिक्षा मंत्रालय से.. कि ऐसी कौन सी बेचैनी थी? मानव संसाधन एवंविकास मंत्रालय छात्र राजनीति के मतभेदों को राष्ट्रविरोधी साबित करने के एकसूत्री कार्यक्रम मेंजुट गया. स्मृति ईरानी करीब आधे घंटे तक रोहित की मौत परसफाई देती रहीं. सियासत न करने की अपील कर रही थीं और सिर्फ सियासत कर रही थीं.बर्बादियों के बेहिसाब टीसों को सिर्फ रोहित का परिवार ही नहीं लाखों करोड़ों लोग रोज महसूस कर रहे हैं. आप रोने के बजाए बस कुछ काम करिये.. उस दर्द के खिलाफ होने के बजाए, उस दर्दको मिटाएं..उनका साथ दें. रोहित को जिस पाप की खातिर अपनी बलि देनी पड़ी उसके सूत्रधार आपकी सरकार के ही दो मंत्री हैं. रोहित तो अब लौट नहीं सकता, लेकिन पाप काप्रायश्चित तो हो सकता है. तो कीजिए. अपने दोनों मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर करके दिखाइए. देश कोये सन्देश दीजिए कि आपकी आंखों में घड़ियाली आंसू नहीं हैं.राजनीति, संवेदनाओं के साथ ही वादों का सिलसिला भी चलता रहेगा, लेकिन उसके परिवार का दुःख शायद ही कम हो. उसकी मौत शर्म भी है और सबक भी. सवाल अब भी वही है कि रोहित की मौत का आखिर जिम्मेदार कौन है? अकेले ‘आप’ ‘हम’ या ‘सब’?
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