Saturday, December 19, 2015

राजनीति बनाम संविधान

लोकसभा चुनाव के दौरान एक इंटरव्यू में बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मैं किसी से बदले की भावना से काम नहीं करूंगा। शपथ ग्रहण करते समय भी यह बात और संवैधानिक तरीके से कार्य करने की बात कही थी। लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत मिलने के बाद बीजेपी ने सबसे पहले संवैधानिक पदों पर बैठे हुए लोगों को अपने कब्जे में लेना शुरू किया।
सबसे पहले 24 राज्यों में गवर्नरों को उनके पद से हटा दिया। जिनमे सिर्फ छह ने ही अपना कार्यकाल पूरा किया था। कमला बेनीवाल को मिजोरम का गवर्नर रहते अपना कार्यकाल खत्म करने से दो महीने पहले ही बर्खास्त कर दिया गया। याद रहे, कमला बेनीवाल और गुजरात के मुख्यमंत्री रहते मोदी की लड़ाई जगजाहिर है। उन सबकी जगह भाजपा नेताओं या अपने राजनीतिक करीबियों को बिठा दिया। फिर इन्ही राज्यों में गवर्नर की दखलअंदाजी शुरू हो गई। हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के गवर्नर ज्योति प्रसाद राजखोवा ने मुख्यमंत्री से बिना सलाह किए स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव विधानसभा में पेश करने का आदेश दे दिया, जिसका कांग्रेस खुलकर विरोध कर रही है और राज्य में तनाव का माहौल पैदा हो गया है।
दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल में खींचतान जगजाहिर है। हाल ही में उपराज्यपाल ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दिल्ली सरकार के फैसलों को न मानें। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच भी टकराव का माहौल है, जिसके चलते वहां की सरकार तय समय में लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं कर पाई।

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