अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दिल्ली सचिवालय स्थित दफ्तर पर सीबीआई छापों की खबर फैलते ही राजनीतिक घमासान शुरू हो गया। अभी तक एसीबी को लेकर केंद्र पर हमले करने वाले केजरीवाल को CBI के छापे के बाद एक और मुद्दा मिल गया है। केजरीवाल वैसे भई कई मौकों पर CBI के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगा चुके हैं। इस बार तो मामला सीधे सीधे उनसे जुड़ा है। जाहिर है वो इस मामले को पूरी तरह से राजनीतिक करार दे कर केंद्र को निशाने पर लेने की पूरी कोशिश करेंगे। केजरीवाल के ट्वीट से साफ है कि उनकी नजर में प्रधानमंत्री मोदी सिर्फ मोदी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करते हुए केजरीवाल ने ये कहा कि चूंकि राजनीतिक तौर पर वो 'आप' सरकार से निबट नहीं पाए, इसलिए ये कायराना हरकत की है। अब तक सीबीआई का प्रयोग विरोधी राज्य सरकारों पर केंद्र सरकार करती रही है। कांग्रेस भाजपा दोनों ही। जयललिता, मायावती, अखिलेश, ममता बनर्जी के खिलाफ दुरूपयोग हुआ था। बिहार चुनाव से पहले एकदम से मुलायम सिंह यादव के सुर सीबीआई ने ही बदले थे। लेकिन इसबार गलत आदमी से पंगा ले लिया है। केजरीवाल ने सचिव के बदले खुद ही मोर्चा संभाला है। खूब आक्रामक हो गए हैं आप के सब नेता। हो सकता है कि यह बात मोदी को न पता हो लेकिन डीडीसीए के भ्रष्टाचार के मामले में अरुण जेटली को लाकर उनकी ही चाल में फंसा दिया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने अपने ट्वीट में लिखा कि पीएम मोदी सीबीआई से डराकर ईमानदार राजनीति को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। प्रमुख बात है कि संसद में सवाल उठा और मीडिया में भी। अब सीबीआई(तोता, माननीय सुप्रीम कोर्टानुसार) भी किसी चुनी हुई राज्य सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने के पहले अपने आका से सौ बार पूछेगी। सीबीआई ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में लिखित तौर पर यह कहा कि व्यापम घोटाला इतना विस्तृत है कि हमारे पास उसकी जांच के लिए संसाधन कम हैं। और दिल्ली में ऐसी जल्दबाजी क्यों? अब सवाल यह उठता है कि क्या नरेंद्र मोदी सरकार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बदले की भावना से काम कर रही है? केजरीवाल के वरिष्ठ अधिकारियों में से एक पर सीबीआई छापे के दौरान जिस तरह से दिल्ली के मुख्यमंत्री को उनके कार्यालय में घुसने से रोका गया, उससे तो यही लगता है। सवाल यह है कि ऐसा क्यों किया गया? मतलब साफ है, दबाव मोदी जी पर है और मोदी को ही उसका जवाब देना है कि क्या वह एक स्टेट्समैन हैं, जिनकी गिनती दुनिया के नेताओं में होती है, या वह एक ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो पीएमओ का इस्तेमाल अपने विरोधियों को निपटाने के लिए करते हैं। पहली नजर में तो यह फैसला केंद्र सरकार के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह लगता है। हो सकता है कि दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर छापेमारी करने के फैसले का सीबीआई के पास मजबूत कारण रहा हो। लेकिन मोदी सरकार के इस कदम से केजरीवाल हीरो बन सकते हैं। क्या ऐसा ही तब भी होता अगर सीबीआई पीएमओ में काम करने वाले किसी नौकरशाह पर भ्रष्टाचार के आरोप में छापा मारती? क्या पीएमओ एक घंटे के लिए भी बंद किया जा सकता था? लेकिन केंद्र सरकार ऐसा काम क्यों करना चाहेगी? एकबारगी मान लेते हैं कि संबंधित नौकरशाह भ्रष्ट है। लेकिन क्या यह तर्क ज्यादा अहम माना जाएगा कि केजरीवाल एक भ्रष्ट अधिकारी को बचा रहे हैं या फिर यह कि जनता के चुने हुए एक मुख्यमंत्री को उसके दफ्तर में घुसने से रोकना ठीक नहीं है। क्या ऐसा ही तब भी होता अगर सीबीआई प्रधानमंत्री कार्यालय में काम करने वाले किसी नौकरशाह पर भ्रष्टाचार के आरोप में छापा मारती? क्या इस हालत में प्रधानमंत्री कार्यालय एक घंटे के लिए भी बंद किया जा सकता था? इन छापों के बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेता तक मान रहे हैं कि मोदी सरकार और भाजपा के लिए इस प्रकरण के राजनीतिक नतीजों से निपटना बहुत बड़ी चुनौती होगा। पहला, अगर किसी के खिलाफ कोई गंभीर आरोप है तो पार्टी उस पर कार्रवाई करने से हिचकती नहीं, फिर भले ही वह उसका अपना क्यों न हो। उदाहरण के लिए व्यापम घोटाले में गंभीर आरोपों का सामना कर रहे मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा की जून में गिरफ्तारी हुई। दूसरा, इसमें कुछ भी नया नहीं है कि सरकारी अधिकारियों पर छापे मारने से पहले सीबीआई मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी न दे। जैसे इस सितंबर में जब राजस्थान सरकार के प्रमुख सचिव (खनन) अशोक सिंघवी की गिरफ्तारी हुई तो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को पहले से इस बारे में नहीं बताया गया था। तीसरा, यह सीबीआई के लिए उसकी आम प्रक्रिया का हिस्सा है कि वह मुख्यमंत्री के लिए काम करने वाले किसी अहम अधिकारी पर छापा मारने के दौरान सीएम के लिए ‘मार्क’ की गई फाइलों की जांच करे, भले ही ये फाइलें मुख्यमंत्री के दफ्तर में रखी गई हों। अब अरविंद केजरीवाल की पूरी टीम अरुण जेटली के उपर डीडीसीए के भ्रष्टाचार को लेकर आरोप लगाना शुरू कर चुकी है। ऐसे में मोदी सरकार के सबसे अहम मंत्री का फँसना सबसे अहम जिंदगी होगी।
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