आज इंडियन एक्सप्रेस में एक रिपोर्ट पढी। जिसके अनुसार महाराष्ट्र में कर्ज के बढ़ते बोझ और सूखे के कारण मराठवाड़ा के 112 किसानों ने इस महीने आत्महत्या कर ली। इस साल मराठवाड़ा क्षेत्र में खुदकुशी करने वाले किसानों की कुल संख्या 1109 तक पहुंच गई है। आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या में पिछले साल की तुलना में यह आंकड़ा दुगुना है। आधिकारिक आंकड़ों में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि इस साल खुदकुशी करने वाले किसानों की संख्या 10 साल में सबसे अधिक रही।
साल 2015 में हर सप्ताह मराठवाड़ा के आठ जिले में तकरीब 20 से 30 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में यह भयावह आंकड़ा बढ़कर 35 तक पहुंच गया। अधिकारियों ने भी 35 किसानों के आत्महत्या की खबर की पुष्टि की। सरकार के किसानों के लिए बनाई योजनाओं और दावों की पोल खोलने के लिए ये आंकड़े काफी हैं। मराठवाड़ा के आठ जिलों में हुई 1109 आत्महत्या की घटनाओं में सबसे ऊपर बीड़ जिले का नाम है। इस जिले के 299 किसानों ने कर्ज और सूखे की वजह से मौत को गले लगा लिया।
बीड़ लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा भी इसी जिले की परली विधानसभा से एमएलए हैं। पंकजा किसानों की खुदकुशी रोकने के लिए इजरायल शैली की खेती की वकालत कर रही हैं। पंकजा का कहना है, 'मराठवाड़ा में भी अगर इजरायल के तरह की खेती होने लगेगी तो इस क्षेत्र के किसानों को इसका लाभ मिलेगा।' वहीं अशोक चव्हान के क्षेत्र नांदेड़ से 187 किसानों ने आत्महत्या की है। इसके जवाब में पूर्व सीएम का कहना है कि यह सब केंद्र और राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों की वजह से हो रहा है।
प्रदेश के उस्मानाबाद इलाके में जहां प्रदेश सरकार 'जीरो सुइसाइड योजना' लागू कर चुकी है वहां 139 किसानों ने आत्महत्या की है। किसानों की खुदकुशी के मामले में यह क्षेत्र बीड़ और नांदेड़ के बाद तीसरे नंबर पर आता है। वहीं अधिकारियों का कहना है, '698 परिवारों को मुआवजे के तौर पर एक लाख रुपए दिया गया है। हालांकि बाकी घटनाएं भी आत्महत्या की हैं लेकिन वह बीमारी और पारिवारिक परेशानियों से तंग आने की वजह से की गईं।'
No comments:
Post a Comment